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बुधवार, 2 नवंबर 2016

माइग्रेन दूर रखने के लिये बदलें दिनचर्या

माइग्रेन ,अर्धशीशि या अर्धकपरी (migraine)
माइग्रेन जिसे अर्धशीशि या अर्धकपरी भी कहते है एक विशेष प्रकार का सिरदर्द है, जिसका सम्बन्ध नसों से होता है। इसके रोगियों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है।
नीचे माइग्रेन के लक्षण कारण और कुछ उपायो के बारे में बताया जा रहा है जो आपके माइग्रेन को नियात्रित करने में मददगार हो सकते है।.






लक्षण-
1.
सर के आधे हिस्से में बहुत अधिक दर्द
2.
हांथ पैरो का ठंडा पड़ना
3.
अधिक पसीना आना
4.
उल्टी होना

 
कारण- वैसे तो माइग्रेन के कारण अलग अलग लोगो के लिये अलग अलग हो सकते है पर कुछ मुख्या कारण निम्न है।
1.
तनाव
2.
अव्यस्थित दिनचर्या
3.
सूर्य की तेज रोशनी या अधिक ठण्ड
4.
अपच 



उपाय जो माइग्रेन रखें दूर - 
1
डॉक्टर के बताया अनुसार दवाई ले
2
अधिक से अधिक पानी पियें
3
भूखे ना रहे ,थोड़ा थोड़ा कई बार खायें,
4
गर्मी में सीधे सूर्य की रौशनी से बचे
5
तनाव से बचें
6
पर्याप्त नींद लें




यह भी पढ़े-गर्म पानी के ऐसे लाभ जो आपको आश्चर्यचकित कर देंगे।

ध्यान दें-जानकारी का उद्देश्य ज्ञानवर्धन मात्र है यह किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय सलाह नहीं है ।स्वस्थ संबधित किसी भी समस्या के लिए चिकित्सक से सलाह/परामर्श करें।

किस माह में किस चीज का सेवन नहीं करना चाहिए।

किस माह में किस चीज का सेवन नहीं करना चाहिए।

विशेष दिनों में उपवास के महत्व का वर्णन किया गया साथ ही साथ किस समय किस भोज्य पदार्थ का सेवन किया जाये और किसका सेवन नहीं किया जाये इसका भी वर्णन आयुर्वेद और विभिन्न ग्रंथो में किया गया है।आज इस लेख में हम ऐसे ही नियमो में से एक नियम के बारे में जानेंगे।

* चैत्र माह में गुड़ खाना या मीठा से दूर रहने को कहा गया है।

* बैखाख माह में नया तेल लगाने को मना किया गया है।

* जेठ माह में दोपहर में चलने को मना किया गया है क्योकि इस माह में गर्मी होती है।

* आषाढ़ माह में पका बेल का सेवन करने से मना किया गया है।

* सावन माह में साग (हरी सब्जियों) खाने मना किया गया है क्योकि बारिश के कारण विभिन्न प्रकार के कीट उत्पन्न होते है ।

* भादौ माह में दही खाना मना किया गया है क्योंकि मौसम परिवर्तन के कारण यह स्वास्थ्य को नुकसान करता है।

* क्वार माह में करेला का सेवन करने से मना किया गया है क्योकि करेला पित्त दोष उत्पन्न कर सकता है।

* कार्तिक माह में बैंगन और जीरा खाने को मना किया गया है क्योंकि इस माह में आए बैगन में कीड़े होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

* माघ माह में मूली और धनिया के सेवन को मना किया गया है क्योंकि इनकी तासीर ठंडी होती है।

* फागुन माह में चना के सेवन से मना किया गया है।


ध्यान दें-जानकारी का उद्देश्य ज्ञानवर्धन मात्र है यह किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय सलाह नहीं है ।स्वस्थ संबधित किसी भी समस्या के लिए चिकित्सक से सलाह/परामर्श करें।